प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) केंद्र सरकार की वह योजना है जिसमें गांव के बेघर परिवारों और कच्चे या जर्जर घरों में रहने वाले परिवारों को पक्का घर बनाने के लिए पैसा दिया जाता है। केंद्र सरकार ने योजना को 2024-25 से 2028-29 तक पांच साल के लिए बढ़ाया है और इस दौरान 2 करोड़ अतिरिक्त घर बनाने का लक्ष्य रखा है।
कितनी सहायता मिलती है
| सहायता | राशि |
|---|---|
| घर निर्माण (मैदानी इलाके) | ₹1.20 लाख |
| घर निर्माण (पहाड़ी राज्य, पूर्वोत्तर, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख) | ₹1.30 लाख |
| मनरेगा से अकुशल मज़दूरी | 90/95 दिन |
| शौचालय | ₹12,000 (स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण या मनरेगा से) |
छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश मैदानी श्रेणी में आते हैं, इसलिए यहां ₹1.20 लाख की सहायता मिलती है। इसके अलावा बिजली, पानी और गैस कनेक्शन जैसी सुविधाएं दूसरी सरकारी योजनाओं से जोड़कर दी जाती हैं।
कौन पात्र है
लाभार्थियों की पहचान दो आधारों पर होती है:
- सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) 2011 के आंकड़े, जिनमें बेघर और कच्चे घर वाले परिवार चिह्नित हैं।
- आवास प्लस सूची, जो नए सर्वे से बनती है। 2024-29 के विस्तार में संशोधित अपात्रता मानकों के साथ आवास प्लस सूची को अपडेट किया गया है।
प्राथमिकता आमतौर पर बेघर, एक या दो कच्चे कमरे वाले, भूमिहीन, SC/ST, अल्पसंख्यक, दिव्यांग और विधवा-मुखिया वाले परिवारों को दी जाती है।
कौन पात्र नहीं है (सामान्य अपात्रता)
जिन परिवारों के पास पहले से पक्का घर है, या जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं, उन्हें लाभ नहीं मिलता। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- जिनके पास पक्का मकान है
- जिनके परिवार में कोई सरकारी कर्मचारी है या जो आयकर देते हैं
- जिनके पास मोटर चालित चार पहिया वाहन या कुछ तय कृषि उपकरण हैं
2024 के बाद अपात्रता के कुछ मानकों में बदलाव किया गया है। अपनी पात्रता की अंतिम पुष्टि के लिए ग्राम पंचायत के सचिव या आवास मित्र से बात करें।
आवास प्लस 2024 सर्वे
नए पात्र परिवारों की पहचान के लिए आवास प्लस 2024 मोबाइल ऐप से सर्वे किया जा रहा है। इसकी खास बातें:
- पंजीकृत सर्वेयर गांव-गांव जाकर सर्वे करते हैं।
- पात्र परिवारों के लिए स्व-सर्वे की सुविधा भी दी गई है।
- आधार आधारित ई-केवाईसी और चेहरे से पहचान होती है।
- मौजूदा घर और प्रस्तावित जगह की जियो-टैग फोटो ली जाती है।
- ऐप ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों मोड में काम करता है।
सर्वे की समय-सीमा राज्यवार तय होती है। अपने गांव में सर्वे की स्थिति ग्राम पंचायत से पूछें।
सूची में नाम कैसे देखें
- pmayg.nic.in खोलें।
- मेनू में आवाससॉफ्ट के अंदर रिपोर्ट (Report) चुनें।
- सामाजिक अंकेक्षण रिपोर्ट (Social Audit Reports) वाले हिस्से में सत्यापन के लिए लाभार्थी विवरण (Beneficiary details for verification) खोलें।
- राज्य, ज़िला, ब्लॉक, ग्राम पंचायत, वर्ष और योजना (प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण) चुनें।
- कैप्चा भरकर सबमिट करें। पंचायत के लाभार्थियों की सूची खुल जाएगी।
पूरी प्रक्रिया हमारी पीएम आवास ग्रामीण सूची गाइड में है।
पैसा कैसे और कब मिलता है
- सहायता राशि सीधे लाभार्थी के आधार से जुड़े बैंक खाते में आती है।
- राशि घर के निर्माण के अलग-अलग चरणों पर किस्तों में दी जाती है।
- हर चरण के बाद आवास ऐप से घर की जियो-टैग फोटो ली जाती है, उसके बाद अगली किस्त जारी होती है।
- किस्त अटकने पर ग्राम पंचायत सचिव, आवास मित्र या जनपद पंचायत के आवास शाखा से संपर्क करें।
घर का डिज़ाइन
लाभार्थी अपने इलाके के हिसाब से सरकार द्वारा सुझाए गए डिज़ाइनों में से चुन सकते हैं। आवास प्लस ऐप में इलाके के अनुकूल निर्माण तकनीक चुनने का विकल्प भी है। घर में कम से कम एक साफ रसोई की जगह होनी चाहिए।
शिकायत कहां करें
- ग्राम पंचायत सचिव या रोज़गार सहायक
- जनपद पंचायत की आवास शाखा
- ज़िला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का कार्यालय
सावधानी
पीएम आवास योजना में नाम जुड़वाने या किस्त दिलाने के लिए कोई शुल्क नहीं है। अगर कोई व्यक्ति इसके लिए पैसे मांगे, तो जनपद पंचायत के अधिकारियों को लिखित शिकायत दें।
आवेदन में आम गलतियां
- बैंक खाता आधार से जुड़ा नहीं: किस्त सीधे खाते में आती है, इसलिए आधार सीडिंग और DBT पहले से चालू रखें।
- ज़मीन का विवाद: जहां घर बनना है, वहां ज़मीन पर कोई विवाद हो तो स्वीकृति अटकती है। ज़मीन के कागज़ साफ रखें।
- गलत फोटो या जगह: जियो-टैग फोटो उसी जगह की होनी चाहिए जहां घर बनना है। गलत फोटो से किस्त रुक सकती है।
- समय पर निर्माण न करना: किस्त मिलने के बाद तय समय में निर्माण का अगला चरण पूरा न होने पर अगली किस्त में देरी होती है।
भूमिहीन परिवारों के लिए
जिन पात्र परिवारों के पास घर बनाने के लिए ज़मीन नहीं है, उनके लिए राज्य सरकारें सरकारी ज़मीन या दूसरी व्यवस्था से भूखंड उपलब्ध कराने का प्रयास करती हैं। ऐसे परिवार ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत से अपनी स्थिति के बारे में जानकारी लें।
निर्माण के चरण और फोटो
घर बनने के हर चरण पर आवास ऐप से जियो-टैग फोटो ली जाती है, जैसे नींव, लिंटल स्तर, छत और पूरा घर। फोटो अपलोड होने और सत्यापन के बाद ही अगली किस्त जारी होती है। इसलिए हर चरण पूरा होते ही ग्राम पंचायत के आवास मित्र या रोज़गार सहायक को बताएं, ताकि फोटो समय पर अपलोड हो।
मनरेगा की मज़दूरी कैसे मिलती है
घर बनाने में परिवार खुद जो मज़दूरी करता है, उसके लिए मनरेगा से 90/95 दिन की अकुशल मज़दूरी मिलती है। इसके लिए परिवार का मनरेगा जॉब कार्ड होना चाहिए। जॉब कार्ड न हो तो ग्राम पंचायत में बनवाएं।